वीपी सिंह से मोदी तक, इन 6 PM के साथ किया पासवान ने काम, हर बार बनाया इतिहास

रामविलास पासवान और पीएम मोदी  बिहार की सियासत के बेताज बादशाह कहे जाने वाले दलित नेता रामविलास पासवान का गुरुवार को देर शाम निधन हो

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रामविलास पासवान और पीएम मोदी (फोटो- PTI)रामविलास पासवान और पीएम मोदी 

बिहार की सियासत के बेताज बादशाह कहे जाने वाले दलित नेता रामविलास पासवान का गुरुवार को देर शाम निधन हो गया है. बिहार के पासवान ऐसे एकलौते नेता हैं, जो 9 बार सांसद और सात बार केंद्र में मंत्री रहे. उनको देश के छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का मौका भी मिला.

केंद्र में जब भी रामविलास पासवान मंत्री बने तो उन्होंने ऐसे काम किए हैं, जिससे सरकार की प्रतिष्ठा बढ़ी तो सत्ताधारी पार्टी के जनाधार में भी इजाफा हुआ. रामविलास पासवान 1977 में पहली बार सांसद बने. इसके बाद उन्होंने पलटकर नहीं देखा. इसके बाद 1980, 1989, 1996, 1998, 1999, 2004 और 2014 में जीत दर्ज हासिल करने में कामयाब रहे. उन्होंने 1991 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर रोसड़ा लोकसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में उन्हें हाजीपुर सीट से 1984 और फिर 2009 में हार का सामना करना पड़ा था.

केंद्र में बने सात बार मंत्री

रामविलास पासवान सात बार केंद्र सरकार में में मंत्री बने, इनमें दो बार अटल बिहारी वाजपेयी और दो बार मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री रहे. 1989 से लेकर अब तक चंद्रशेखर और वीपी नरसिम्हा राव की सरकार को छोड़कर केंद्र में जिस दल की भी सरकार बनी, उसमें रामविलास पासवान  मंत्री बनना जरूर बने हैं. विश्वनाथ प्रताप सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी सरकार में पासवान मंत्री रहे हैं.

मंडल आयोग की सिफारिशें लागू कीं

हालांकि, पासवान को जब भी केंद्र में मंत्री पद मिला, उन्होंने कोई ना कोई ऐसा काम जरूर किया जो देशव्यापी चर्चा में जरूर रहा है. पहली बार छह दिसम्बर 89 को वह प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के मंत्रिपरिषद में श्रम व कल्याण मंत्री बने. इस दौरान वो समाज कल्याण मंत्री थे, जिसके चलते उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों को देश में लागू करने का काम किया था. इसके चलते ओबीसी समुदाय के 27 फीसदी आरक्षण का लाभ मिला, जिससे देश की राजनीति बदल गई.

रेल मंत्री के तौर पर लिए अहम फैसले
रामविलास पासवान 1995 में तब केंद्र में मंत्री बने जब एचडी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री. देवगौड़ा सरकार में रामविलास पासवान को रेल मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया था. रेल मंत्रियों के तौर पर उन्होंने कुलियों को लेकर बड़ा फैसला लिया था और साथ ही यात्री सुविधाओं में भी वृद्धि करने का काम किया. रेल मंत्री के रूप में उन्होंने जून 96 से 13 मार्च 98 तक काम किया. इसके बाद गुजराल सरकार में भी वो रेल मंत्री के पद पर रहे.

गांव-गांव तक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना
हालांकि, 1996 में संयुक्त मोर्चा की सरकार गिर गई, जिसके बाद रामविलास पासवान ने एनडीए के साथ हाथ मिला लिया. अटल बिहार बाजपेयी सरकार में संचार मंत्री बने. गांव तक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाने का श्रेय उन्हीं को जाता है. संचार मंत्रालय के बाद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में ही खनन मंत्री बने और उस वक्त भी उन्होंने कोयले की रॉयल्टी को लेकर बड़ा फैसला लिया था. हालांकि, 2002 में पासवान एनडीए से अलग हो गए थे.

बिना राशन कार्ड के भी घर-घर राशन पहुंचाया
2004 में यूपीए की सरकार बनी तो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पासवान को रसायन व उर्वरक मंत्री बनाया था. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में वह मई 2004 से मई 2009 तक मंत्री रहे. इसके बाद वो चुनाव हार गए थे औ यूपीए का साथ छोड़कर 2014 के चुनाव से पहले एनडीए में दोबारा हाथ मिला लिया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहली सरकार में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री रहे और दोबारा 2019 में भी इसी विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. कोरोना काल में देशभर में घर-घर राशन पहुंचाने का काम बाखूबी तरीके से निभाया ताकि कोई भूखा न रह सके. यही नहीं बिना राशन कार्ड वालों को भी अनाज देने का काम किया.

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