Bihar Elections 2020: चुनाव से पहले माहौल बदलना कोई CM नीतीश से सीखे! इन फैसलों का कैसे सामना करेगा तेजस्वी खेमा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। सत्ताधारी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) भी इसमें

कृषि बिल: मोदी सरकार पर बरसे तेजस्वी- खेती के निजीकरण की साजिश, एक देश एक MSP क्यों नहीं?
विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस का सफाया – डाॅ. प्रेम कुमार
डेढ़ साल बाद चुनाव, हरसिमरत ने यूं ही नहीं चला किसान बिल पर इस्तीफे का दांव
bihar assembly elections 2020: cm nitish kumar these decisions may change political scenario

पटना
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। सत्ताधारी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) भी इसमें पीछे नहीं है। पार्टी के मुखिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद मोर्चा संभाल रखा है। अपनी सधी राजनीतिक चालों से वो न केवल चुनाव के पहले सियासी माहौल बदलने में जुटे हैं बल्कि सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश कर रहे हैं।

नियोजित शिक्षकों को लेकर सीएम नीतीश ने लिया बड़ा फैसला

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहचान राजनीति में एक मंझे खिलाड़ी के रूप में होती है, जिन्हें ‘सोशल इंजीनियरिंग’ में भी दक्ष माना जाता है। बिहार में करीब 15 साल सत्ता में रहने के बाद इस बार उन्होंने चुनाव के पहले ही माहौल को बदलना शुरू कर दिया है। पिछले कई सालों से अपनी मांगों को लेकर कई बार सड़कों पर उतर चुके नियोजित शिक्षकों के लिए उन्होंने नई सेवाशर्त नियमावली को मंजूरी दी। अपने इस फैसले से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चार लाख शिक्षकों को खुश करने की कोशिश की है। यही नहीं इनके जरिए सरकार के प्रति इनकी नराजगी को भी दूर करने का प्रयास किया।

कोरोना संकट को लेकर उठाए ये जरूरी कदम

इसी तरह कोरोना की जांच की संख्या में बढ़ोतरी कर विपक्ष के हाथ से इस मुद्दे को भी छीन लिया है। बिहार में फिलहाल प्रतिदिन औसतन एक लाख से अधिक कोरोना के टेस्ट किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जांच बढ़ाए जाने के बाद रिकवरी रेट में भी वृद्धि हुई है।

 

जीतनराम मांझी के जरिए साधा एक तीर से दो निशाने!

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को अपने खेमे में लाकर नीतीश कुमार ने महागठबंधन को तगड़ा झटका दिया। इस कदम से उन्होंने ना केवल दलित मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की है, बल्कि मांझी के जरिए एनडीए गठबंधन में एलजेपी के दबाव की राजनीति को भी कुंद करने की सियासी चाल चली है। हाल में एनडीए के दो घटक दलों एलजेपी और जेडीयू में शीत युद्ध की स्थिति बनी हुई है। एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान विभिन्न मुद्दों को लेकर नीतीश कुमार पर निशाना साधते रहे हैं।

दलित जॉब का ‘मास्टर स्ट्रोक’

मुख्यमंत्री ने चुनाव की घोषणा से ठीक पहले शुक्रवार को एक और बड़ा फैसला लिया। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गठित राज्य स्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक हुई। इसमें किसी एससी या एसटी समुदाय के व्यक्ति की हत्या होने पर उसके परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी देने से संबंधित नियम तुरंत बनाने का निर्देश देकर दोनों समुदायों को साधने का प्रयास किया है। हालांकि, ऐसा चुनाव के पहले संभव नहीं दिख रहा है।

आरजेडी के कई विधायक-नेता जेडीयू में आए

चर्चा है कि वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव भी जल्द ही जेडीयू के साथ आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इसका लाभ भी नीतीश की पार्टी को मिलना तय माना जा रहा है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और सूचना-जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार कहते भी हैं कि नीतीश कुमार ने सत्ता संभालने के बाद ही न्याय के साथ विकास को मूलमंत्र बनाया। समाज के अंतिम पंक्ति पर खड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि यहां के लोगों की पसंद नीतीश कुमार बने हुए हैं। इसके अलावा, हाल के कुछ दिनों में नीतीश कुमार ने आरजेडी के कई विधायकों और नेताओं को तोड़कर अपने पक्ष में लाकर भी उसे जोरदार झटका दिया है। ऐसे में कुछ महीने पहले तक कई परेशानियों में घिरे नीतीश कुमार अपनी सधी राजनीतिक चालों से माहौल बदलने में सफल दिखने लगे हैं।

COMMENTS

WORDPRESS: 0
DISQUS: 0