रांची, [अमन मिश्रा]। चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता उच्च श्रेणी के कैदी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद रिम्स के 14 गुणा 14 फीट के कमरे से निकल कर रिम्स के ही केली बंगले में शिफ्ट हो गए हैं। ये इकलौते ऐसे मरीज हैं जिन्होंने रिम्स के पेइंग वार्ड में रहने के दौरान हर दिन 1,000 रुपये के हिसाब से दो साल में करीब सात लाख रुपये का भुगतान किया है। होटवार जेल से लालू को साल 2018 में इलाज के लिए रिम्स में शिफ्ट किया गया था।

कार्डियोलॉजी विभाग में इलाज के दौरान लालू ने शिकायत की थी कि यहां आसपास बहुत से कुत्ते हैं जो रात भर शोर मचाते हैं, इससे वह सो नहीं पाते। इसके बाद लालू की परेशानी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें रिम्स के ही 1000 रुपये प्रतिदिन वाले पेइंग वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। छह सितंबर 2018 से वे यहां अपना इलाज कराते रहे। पिछले महीने उन्हें केली बंगले में शिफ्ट किया गया।

शुल्क की जानकारी नहीं

निदेशक आवास में रह रहे लालू प्रसाद के किराए अथवा अन्य शुल्क के बारे रिम्स अधीक्षक से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में क्या नियम हैं उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। बताते चलें कि राजद सुप्रीमो को निदेशक बंगले में शिफ्ट करने के लिए अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप ने ही जेल प्रबंधन को पत्र लिखा था।

तीन एकड़ में है बंगला, नौकर-चाकर अलग से

कोरोना का हवाला देकर लालू प्रसाद को मुफ्त में तीन एकड़ का बंगला दे दिया गया। बंगले में चार बड़े-बड़े कमरे, तीन वाशरूम, दो बड़े डाइनिंग हॉल, एक ड्रॉइंग रूम, एक बड़ा बरामदा, गैरेज और एक सर्वेंट क्वार्टर है। इसके अतिरिक्त एक बड़ा सा लॉन है जिसमें कई तरह के पेड़-पौधे लगे हैं। बंगले में चार सेवादारों को लगाया गया है, जिसका भुगतान भी रिम्स प्रबंधन ही कर रहा है।

ऐसी सुविधा देना सरासर गलत

लालू प्रसाद को सरकार की ओर से ऐसी सुविधा देना पूरी तरह से गलत है। एक सजायाफ्ता कैदी को इतनी सुविधा नहीं दी जा सकती। कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार ने यदि ऐसा किया है, तो सभी कैदियों को ऐसी सुविधा देनी चाहिए थी। लेकिन बिना किसी प्रवधान के सजायाफ्ता कैदी को मुफ्त में रिम्स निदेशक का बंगला देना सरासर गलत है। -मनोज टंडन, लालू प्रसाद को बंगले में शिफ्ट करने के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता के अधिवक्ता।