PUBG बैन से बच्चे हुए मायूस, पैरंट्स ने किया ‘चिकन डिनर’

पबजी बैन होने से एक तरफ बच्चे काफी मायूस हैं तो दूसरी तरफ पैरंट्स खुश हैं लेकिन एक चिंता यह भी है कि बच्चे कहीं अब दूसरी गेम्स की ओर न मुड़ जाए।

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पबजी बैन होने से एक तरफ बच्चे काफी मायूस हैं तो दूसरी तरफ पैरंट्स खुश हैं लेकिन एक चिंता यह भी है कि बच्चे कहीं अब दूसरी गेम्स की ओर न मुड़ जाए। दरअसल, पैरंट्स का कहना है कि इस ऐप ने बच्चों को जकड़ रखा था। अच्छा है कि यह बैन हो गया है।

 
PUBG

हाइलाइट्स:

  • भारत में पबजी बैन से बच्चे परेशान लेकिन उनके पैरंट्स हैं खुश
  • भारत ने पबजी समेत चीन के 118 और मोबाइल ऐप पर लगाया बैन
  • भारत अब तक चीन के 224 मोबाइल ऐप पर लग चुका है प्रतिबंध
  • राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए चीनी मोबाइल ऐप्स पर लगा बैन

अमनदीप सिंह
नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने बुधवार को पॉपुलर मोबाइल गेमिंग ऐप पबजी पर बैन (Chinese app PUBG banned in India) लगा दिया। इस बैन के बाद जहां एक तरफ गेमर और बच्चे परेशान हैं वहीं पैरंट्स खुश हैं। जैसे गेम्स जीतने के बाद प्लेयर्स ‘चिकन डिनर’ करते थे, वैसे ही बैन की खबर सुनकर पैरंट्स ने कहा, अब हम चिकन डिनर करेंगे।

वेस्ट दिल्ली में रहने वाले मुकेश शर्मा ने बताया कि इससे अच्छा काम पीएम मोदी ने नहीं किया है। उनका कहना है कि बेटा रोजाना सुबह-शाम सिर्फ पबजी खेलता रहता था। अब थोड़ी राहत मिलेगी। उसके दोस्तों का भी आना कम होगा। लॉकडाउन में सारा-सारा दिन बेटा और उसके दोस्त पबजी ही खेलते रहते थे।

मुकेश ने बताया, ‘रात में ‘मार-मार’…जोर-जोर से चिल्लाना मुझे काफी परेशान करता था। हमने काफी समझाया लेकिन उसे इस गेम की लत पड़ गई थी।’ मुकेश के बेटे ने बताया कि वह इस फैसले से नाराज है और पबजी का चिकन डिनर जरूर मिस करेगा।

जसमीत सिंह ने बताया कि उनका बेटा पॉकेटमनी सिर्फ इसलिए लेता था कि गेम में अच्छी गन खरीद सके। उसने हजारों रुपये उड़ा दिए। उसके खेलने से परेशान नहीं थे, क्योंकि वह फिक्स टाइम में ही खेलता था। मगर, पैसों की बर्बादी उन लोगों को खा रही थी। अब वह उसी पॉकेटमनी को अपने जरूरी कामों में इस्तेमाल करेगा।

PUBG समेत 118 चाइनीज ऐप्स भारत में हुए बैन,

2 बच्चों के पिता इंदर ने कहा, ‘मैं और मेरे दोनों बेटे खाली टाइम में यह गेम खेलते थे। हम तो रॉयल पास तक खरीदते थे। गेम अच्छा था…लेकिन देश सबसे ऊपर है। हमारी खेलने की आदतों से मेरा परिवार परेशान था लेकिन टाइमपास करने के लिए और करते भी क्या। अब किसी और चीज में दिल लगाएंगे।’

गेमर साहिल ने बताया कि पबजी टूर्नामेंट से उन्होंने काफी पैसे कमाए हैं। बैन सही नहीं है। साहिल ने बताया कि वह दुखी हैं। साहिल की तरह ही पाल ने बताया कि दोस्तों के साथ ऑनलाइन गेम खेलना आदत बन गई थी। कभी-कभी ऑनलाइन दोस्त भी बन गए। ये सब मिस करेंगे।

ईस्ट दिल्ली में रहने वाली सोनिया का कहना है कि उनके हसबैंड ऑफिस के अलावा सिर्फ पबजी ही खेलते थे। रोजाना उनके हंगामे से काफी परेशनी होती थी। फैमिली को टाइम भी देना बंद कर दिया था। अब इसमें काफी चेंज आने वाला है। सोनिया ने कहा कि बैन की न्यूज सुनकर वह काफी खुश हो गई थीं और उनके पति का चेहरा लटक गया था।

उधर, एनसीआर में भी पैरंट्स का भी कुछ ऐसा ही रिऐक्शन है। ज्यादातर पैरंट्स पबजी पर बैन से खुश हैं।

पब्जी से बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके मानसिक स्तर पर भी काफी असर पड़ रहा था। इससे अभिभावक भी प्रभावित हो रहे थे। यह बैन सही है। -आशीष गुप्ता

टेक्नॉलजी को देखते हुए कई ऐप काफी फायदेमंद भी होते हैं, लेकिन इस तरह के ऐप बच्चों की सेहत के लिए बिल्कुल भी अच्छे नहीं है।

-ललित कौशिक

मैंने हमेशा अपने बच्चों को ऑनलाइन गेम से दूर रखने का प्रयास किया है। लॉकडाउन के दौरान भी बच्चों को गेम नहीं खेलने दिया। यह राहत भरी खबर है। – जितेंद्र

स्कूल व कॉलेज जाने वाले छात्रों में भी पब्जी का क्रेज काफी देखा गया है। पब्जी के कारण बच्चे कई घंटे खराब कर देते हैं। यही नहीं कई हादसे भी इस वजह से हो चुके हैं।– राजेश सैनी, गुड़गांव गांव

पिछले कुछ साल से मैं लगातार पब्जी खेल रहा था। इसमें मजा भी आता था लेकिन देश की सिक्यॉरिटी को देखते हुए यह फैसला बिल्कुल सही है। – सौरभ

पिछले 2 साल से पब्जी खेल रही थी। मैंने कभी भी ऐप बंद होने की उम्मीद नहीं की थी लेकिन अगर बंद किया गया है तो मैं इसके समर्थन में भी हूं।– सलोनी जैन

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