जानिए क्या है लखनऊ नगर निगम बॉन्ड, जिसकी CM योगी की मौजूदगी में BSE में हुई लिस्टिंग

बीएसई में बॉन्ड की लिस्टिंगउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मुंबई में लखनऊ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (LMC) के बॉन्ड लिस्टिंग

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मुंबई में लखनऊ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (LMC) के बॉन्ड लिस्टिंग कार्यक्रम में शामिल हुए. लखनऊ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (LMC) बॉन्ड जारी करने वाला उत्तर भारत का पहला नगर निगम बन गया है. आइये जानते हैं कि क्या होते हैं म्युनिसिपल बॉन्ड और इनसे नगर निगम किस तरह से पैसे जुटाते हैं?

मुंबई में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बुधवार को इस बॉन्ड की लिस्टिंग हुई. इस कार्यक्रम के चीफ गेस्ट यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ थे. इस बॉन्ड के माध्यम से जुटाई गई धनराशि को राज्य की राजधानी में विभिन्न बुनियादी ढांचागत योजनाओं में निवेश किया जाएगा.

लखनऊ नगर निगम के बॉन्ड पर निवेशकों को 8.5 फीसदी वार्षिक ब्याज मिलेगा और इसकी परिपक्वता अवधि 10 साल है. इस बॉन्ड की सफल लॉन्चिंग से लखनऊ नगर निगम की भी छवि बदलेगी और इसे देश-विदेश से निवेश जुटाने में भी मदद मिलेगी. इस बॉन्ड लॉन्च करने से पहले वित्तीय एजेंसियों ने इसकी रेटिंग की है और बॉन्ड को अच्छी रेटिंग दी है.

देश में बढ़ते तेजी से शहरीकरण को देखते हुए शहरों को अगले वर्षों में बुनियादी ढांचा विकास के लिए बड़े पैमाने पर रकम जुटाने की जरूरत होगी. म्युनिसिपल बॉन्ड से ऐसा माना जाता है कि सस्ती दर पर कर्ज जुटाया जा सकता है.

क्या होते हैं बॉन्ड 

सबसे पहले आपको यह बताते हैं कि बॉन्ड क्या होते हैं. बॉन्ड असल में एक तरह का साख पत्र होता है, जिसके तहत आम जनता या संस्थाओं से धन जुटाये जाते हैं. इसमें एक बॉन्ड जारी करने वाली संस्था एक निश्चित समय के लिए रकम उधार लेती है और निश्चित रिटर्न यानी ब्याज देने के साथ मूलधन वापस करने की गारंटी देती है. यह नि​वेशकों के लिए निश्चित आय का एक निवेश साधन होता है. यह एक तरह से कर्ज लेने वाले और देने वाले के बीच समझौता होता है.

क्या होते हैं म्युनिसिपल बॉन्ड 

म्युनिसिपल या नगर निगम बॉन्ड शहरी स्थानीय निकायों द्वारा जारी किये जाते हैं. शहर में विकास कार्यों को जारी रखने के लिए बड़े पैमाने पर धन की जरूरत होती है, इसलिए सरकार से पैसा लेने की जगह यह एक अच्छा वैकल्पिक स्रोत साबित हो रहा है. इस तरह से बॉन्ड जारी कर नगर निगम पैसा जुटाते हैं और उसे शहर के बुनियाद ढांचा विकास जैसे कार्यों पर खर्च करते हैं.

सेबी के निर्देश 

पूंजी बाजार नियामक SEBI ने साल 2015 में शहरी निकायों के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने के लिए दिशानिर्देश जारी किये थे. सेबी के निर्देश के मुताबिक सिर्फ वही शहर ऐसे बॉन्ड जारी कर सकते हैं, जिनका नेटवर्थ लगातार तीन पिछले वित्त वर्ष तक नेगेटिव न रहा हो और पिछले एक साल में उन्होंने कोई लोन डिफाल्ट न किया हो. इसके अलावा जनता को निवेश के लिए सिर्फ वही म्युनिसिपल बॉन्ड जारी किये जा सकते हैं जिनकी रेटिंग BBB या इससे ज्यादा हो.

टैक्स बचत का फायदा 

लॉन्ग टर्म में निश्चित रिटर्न मिलने की बात होती है, इसलिए जनता भी इसमें भरोसे के साथ निवेश करती है. शेयर बाजार में लिस्टेड होने के बाद इसमें आम जनता भी एक्सचेंजों के माध्यम से निवेश कर सकती है. इन बॉन्ड पर निवेशक को मिलने वाला रिटर्न इनकम टैक्स से मुक्त होता है. इसकी रेटिंग एजेंसियों से रेटिंग जारी होती है, इसलिए इन्हें सुरक्षित निवेश भी माना जाता है.

अभी तक कुल 11 नगर निगम बॉन्ड जारी किये हैं जिनसे करीब 3690 करोड़ रुपये जुटाये गये हैं. इनमें से बीएसई बॉन्ड मंच का योगदान 3,175 करोड़ रुपये है. इसके पहले अमरावती (2000 करोड़ रुपये), विशाखापत्तनम (80 करोड़ रुपये), अहमदाबाद (200 करोड़ रुपये), सूरत (200 करोड़ रुपये), भोपाल (175 करोड़ रुपये), इंदौर (140 करोड़ रुपये), पुणे (495 करोड़ रुपये), हैदराबाद (200 करोड़ रुपये) जैसे शहरों के भी म्युनिसिपल बॉन्ड आ चुके हैं.

बीएसई बॉन्ड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए लखनऊ नगर निगम ने पिछले हफ्ते ही इस बॉन्ड के लिए प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिये 200 करोड़ रुपये जुटा लिये हैं.

इसका मतलब यह है कि बॉन्ड को जनता के लिए जारी करने से पहले ही कुछ बड़ी संस्थाओं से यह रकम जुटा ली गयी है.  इसमें चौथे से लेकर सातवें साल तक 7 साल तक समान किश्त में मूलधन को वापस किया जाएगा.

बॉम्बे स्टाक एक्सचेंज का प्लेटफॉर्म नगर निगमों के लिए बॉन्ड के जरिए धन इकट्ठा करने का अच्छा साधन बन गया है. लखनऊ नगर निगम के बॉन्ड की लॉन्चिंग के बाद यूपी सरकार गाजियाबाद, वाराणसी, आगरा और कानपुर के नगर निकाय के बांड लॉन्च करने की तैयारी में है.

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