मालदीव में भारत ने उठाया ये कदम, बढ़ सकती है चीन की बेचैनी

भारत ने रविवार को मालदीव सरकार को 25 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है. कोरोना वायरस महामारी की वजह से तमाम देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है

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भारत ने रविवार को मालदीव सरकार को 25 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है. कोरोना वायरस महामारी की वजह से तमाम देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है और मालदीव भी इससे अछूता नहीं रहा. इस आर्थिक संकट की घड़ी में भारत ने मालदीव को आर्थिक सहायता दी है.

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भारत के इस कदम को चीन से भी जोड़कर देखा जा रहा है. मालदीव में चीन का निवेश लगातार बढ़ता जा रहा है और यहां के विदेशी कर्ज में करीब 70 फीसदी हिस्सा चीन का है. मालदीव हिंद महासागर में सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण जगह पर स्थित है इसलिए भारत के लिए मालदीव में चीन के इस दबदबे को कम करना जरूरी हो गया है.

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भारत की आर्थिक मदद को लेकर शुक्रिया अदा करते हुए मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह ने ट्विटर पर लिखा, “जब भी मालदीव को एक दोस्त की मदद की जरूरत होती है, भारत ऐसे मौकों पर सामने आता है. पीएम मोदी, सरकार और भारत के लोगों का तहे दिल से शुक्रिया, उन्होंने आज 25 करोड़ डॉलर की मदद कर पड़ोसी होने की भावना और उदारता दिखाई है.”

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मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने भी इस मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया. मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर बहुत ज्यादा निर्भर है इसलिए कोरोना वायरस का अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा है.

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भारत की तरफ से आर्थिक मदद की घोषणा विदेश मंत्री एस. जयशंकर और मालदीव के विदेश मंत्री शाहिद के बीच 13 अगस्त को हुई वर्चुअल मीटिंग के दौरान की गई थी. इस इवेंट में शाहिद ने कहा था, पूरी दुनिया एक अदृश्य दुश्मन का सामना कर रही है, एक ऐसे खतरा हमारे सामने है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. वायरस ने दुनिया भर की एयरलाइन्स के संचालन को रोक दिया और सभी देशों को मुश्किल फैसले लेने पड़े. ये एक ऐसी महामारी है जिसने हमें अपनी सीमाओं और घरों को बंद करने के लिए मजबूर कर दिया. लेकिन हमेशा की तरह हमारे दोस्तों ने साबित कर दिया कि महामारी की वजह से उन्होंने अपने दिल के दरवाजे बंद नहीं किए हैं. इस मुश्किल वक्त में भी भारत ने दोस्ती निभाई है.

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मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोली ने आर्थिक संकट से निकलने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी से मदद मांगी थी जिसके बाद भारत ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया. इस कर्ज की ब्याज दर बहुत कम है और इसे वापस करने के लिए मालदीव के पास 10 साल का वक्त होगा. इस कर्ज को लेकर बहुत कम शर्तें रखी गई हैं और मालदीव अपनी प्राथमिकता के आधार पर इस धनराशि को खर्च कर सकता है.

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भारत मालदीव की सहायता के लिए डॉक्टरों और विशेषज्ञों का दल भी भेजेगा. मालदीव से करीब 500 मरीज इलाज के लिए भारत आएंगे. इससे पहले, भारतीय डॉक्टरों और विशेषज्ञों के एक दल ने मार्च महीने में मालदीव का दौरा किया था और अप्रैल-मई महीने में 11 टन दवाएं भेजी थीं. भारत ने मालदीव के लिए मेडिकल सप्लाई, टेस्ट किट और जरूरी सामान को लेकर पाबंदी भी हटा दी थी.

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